मोहर्रम में ‘शेर’ बनने और डीजे-ढोल पर रोक की मांग: मुस्लिम समाज ने राजनांदगांव एसपी को सौंपा ज्ञापन

राजनांदगांव। मुस्लिम समुदाय ने धार्मिक त्योहारों और पवित्र मौकों पर होने वाली गैर-शरिया रस्मों, हुड़दंग और डीजे के शोर-शराबे पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इसी सिलसिले में राजनांदगांव की जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी और जुल्फिकार-ए-हैदरी कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा है। यह जानकारी मनिहार बिरादरी छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रभारी मोहम्मद इकबाल हनफ़ी ने दी है।
उर्स की तर्ज पर मोहर्रम में भी सख्ती की मांग
मनिहार बिरादरी के मीडिया प्रभारी मोहम्मद इकबाल हनफ़ी के अनुसार, हाल ही में भिलाई, बिलासपुर और धानखमरिया के उर्स के दौरान कुछ तत्वों द्वारा शराब के नशे में हुड़दंग करने, नर्तकियों को बुलाकर नाच-गाना करने और देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजाने के मामले सामने आए थे।
इस पर संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज ने पूरे प्रदेश के एसपी और कलेक्टरों को आदेश जारी कर उर्स और अन्य धार्मिक स्थलों पर रात 11 बजे के बाद डीजे बजाने, कानून व्यवस्था बाधित करने और गैर-शरिया गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं।
‘शेर बनना इस्लामी रिवायत का हिस्सा नहीं’
आगामी 17-18 तारीख को होने वाले मोहर्रम के मद्देनजर जामा मस्जिद के सदर रईस अहमद शकील साहब और जुल्फिकार-ए-हैदरी कमेटी के अध्यक्ष ओवैस मेमन के नेतृत्व में मुस्लिम समाज ने मांग की है कि मोहर्रम के दौरान भी वक्फ बोर्ड के इस कड़े नियम को लागू किया जाए।
समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से कहा:
”मोहर्रम के मौके पर ढोल-ताशों और बैंड-बाजे के साथ शो करना या कुछ लोगों का शरीर पर रंग लगाकर ‘शेर’ बनना पूरी तरह से गैर-शरिया है। इस्लाम और शरियत में इन चीजों की कोई जगह नहीं है। यह सिर्फ मनोरंजन और हुड़दंग का जरिया बन चुका है, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक जाम होता है और कानून व्यवस्था प्रभावित होती है।”
मुस्लिम समाज ने की सादगी से त्योहार मनाने की अपील
मुस्लिम समुदाय ने वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज द्वारा की गई इस पहल का पुरजोर स्वागत किया है। मोहम्मद इकबाल हनफ़ी ने बताया कि समाज के वरिष्ठ जनों ने राजनांदगांव के पूरे मुस्लिम समाज से आह्वान किया है कि मोहर्रम के पवित्र मौके पर कोई भी व्यक्ति ‘शेर’ न बने और न ही किसी प्रकार की गैर-कानूनी गतिविधि में शामिल हो। त्योहार को इस्लामी तहज़ीब के मुताबिक दरूद-फातिहा पढ़कर और पूरी सादगी व मर्यादा के साथ मनाया जाना चाहिए, ताकि किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े।
