नवम दिवसमाँ सिद्धिदात्री की पूजा आराधना से सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है।
नवम दिवस
माँ सिद्धिदात्री की पूजा आराधना से सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्रि-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है।
मां सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं। देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वे लोक में ‘अर्द्धनारीश्वर’ नाम से प्रसिद्ध हुए।
मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है। प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह मां सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरंतर प्रयत्न करें। उनकी आराधना की ओर अग्रसर हो। इनकी कृपा से अनंत दुख रूप संसार से निर्लिप्त रहकर सारे सुखों का भोग करता हुआ वह मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।
एक किंवदंती के अनुसार, ब्रह्मांड की शुरुआत में,शिव ने सृष्टि की रचना करने के लिए महान देवी महादेवी के अव्यक्त रूप की पूजा की।कहा जाता है कि देवी शिव के बाएं आधे भाग से सिद्धिदात्री के रूप में प्रकट हुईं।यह भी माना जाता है कि उन्होंने शिव को अष्ट सिद्धि (आठ आध्यात्मिक उपलब्धियाँ) प्रदान कीं ।
