बढ़ई पारा से निकली भगवान विश्वकर्मा जी की भव्य शोभायात्रा..
बढ़ई पारा से निकली भगवान विश्वकर्मा जी की भव्य शोभायात्रा..
राजधानी मे लगभग 200 साल पहले शुरु हुई थी विश्वकर्मा पूजा
रायपुर : भगवान विश्वकर्मा पूजन राजधानी समेत पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है। शहर मे मुख्य आयोजन बढ़ई पारा में प्रतिमा स्थापित कर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की गई। विश्वकर्मा समाज ने बढ़ई पारा स्थित प्रदेश के इकलौते विश्वकर्मा मंदिर से आरती-पूजन कर तरह-तरह की झांकियो के साथ शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा राठौर चौक, तेलघानी नाका, आमापारा चौक, तात्यापारा चौक होते हुए बढ़ई पारा श्री दुलार विश्वकर्मा धर्मशाला पहुंची जहा प्रसाद वितरण एवं भण्डारें का आयोजन किया गया। श्री विश्वकर्मा समाज के मिडिया प्रभारी श्री पंकज शर्मा ने बताया की विश्वकर्मा समाज के लोग मुख्यत: बढ़ई पारा मे कृषि औजर यानी बैल गाड़ी के चक्के, हल आदि बनाते है। इस समाज के लोग लगभग 250 साल पहले उत्तर भारत के राज्यो से रायपुर पहुंचे। वही विश्वकर्मा पूजन लगभग 200 साल से हो रही है। सबसे पहले भव्य पूजा बढ़ई पारा मे होती थी। समय के साथ धीरे-धीरे अब राजधानी के अनेक इलको में बड़े पैमाने पर पूजा होने लगी है। श्री शर्मा ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा पश्चिम बंगाल से शुरु हुई है। उन्होंने ये भी बताया की बढ़ई पारा ललिता चौक में भगवान श्री विश्वकर्मा जी का 100 साल से भी अधिक पुराना मंदिर है।

राजधानी मे लगभग 200 साल पहले शुरु हुई थी विश्वकर्मा पूजा
रायपुर : भगवान विश्वकर्मा पूजन राजधानी समेत पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है। शहर मे मुख्य आयोजन बढ़ई पारा में प्रतिमा स्थापित कर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की गई। विश्वकर्मा समाज ने बढ़ई पारा स्थित प्रदेश के इकलौते विश्वकर्मा मंदिर से आरती-पूजन कर तरह-तरह की झांकियो के साथ शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा राठौर चौक, तेलघानी नाका, आमापारा चौक, तात्यापारा चौक होते हुए बढ़ई पारा श्री दुलार विश्वकर्मा धर्मशाला पहुंची जहा प्रसाद वितरण एवं भण्डारें का आयोजन किया गया। श्री विश्वकर्मा समाज के मिडिया प्रभारी श्री पंकज शर्मा ने बताया की विश्वकर्मा समाज के लोग मुख्यत: बढ़ई पारा मे कृषि औजर यानी बैल गाड़ी के चक्के, हल आदि बनाते है। इस समाज के लोग लगभग 250 साल पहले उत्तर भारत के राज्यो से रायपुर पहुंचे। वही विश्वकर्मा पूजन लगभग 200 साल से हो रही है। सबसे पहले भव्य पूजा बढ़ई पारा मे होती थी। समय के साथ धीरे-धीरे अब राजधानी के अनेक इलको में बड़े पैमाने पर पूजा होने लगी है। श्री शर्मा ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा पश्चिम बंगाल से शुरु हुई है। उन्होंने ये भी बताया की बढ़ई पारा ललिता चौक में भगवान श्री विश्वकर्मा जी का 100 साल से भी अधिक पुराना मंदिर है।
