शंकराचार्यजी का अपमान सर्वथा अनुचित – लक्ष्मीमणि शास्त्री

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अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

प्रयागराज – भारत में संत समाज भारतीय संस्कृति , आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता के प्रतीक रहे हैं। संतों की मर्यादा बनाये रखना ना केवल सरकार की बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदजी महाराज को स्नान से रोकने पर समस्त संत समाज आक्रोशित है। वे अपनी पालकी में सवार होकर संगम नोज तक जाना चाहते थे लेकिन पुलिस ने भीड़ और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुये उन्हें अनुचित तरीके से रोक दिया। ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्रीस्वरूपानंद सरस्वतीजी महाराज द्वारा संस्थापित और संरक्षित हिंगलाज सेना की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री लक्ष्मीमणि शास्त्री ने कहा सरकार का दायित्व है कि वह मठ मंदिरों की परंपराओं और साधु समाज की परंपराओं को सुरक्षित रखे। प्रयागराज में मौनी अमावस्या से लेकर वसंतपंचमी तक धरनारत शंकराचार्य स्वामी श्रीअविमुक्तेश्वरानंद सरस्वतीजी महाराज को संगम स्नान ना करने देना सर्वथा अनुचित और शास्त्र विरुद्ध है।सरकार और प्रशासन को अविलंब स्वामीजी से माफी मांगकर उन्हें स्नान करने के लिये मनाना चाहिये , अन्यथा हिंगलाज सेना कठोर कदम उठाने के लिये प्रतिबद्ध हो जायेगी। संत समाज ने हमेशा देश की संस्कृति और एकता को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार के साथ – साथ सनातन समाज को भी यह सुनिश्चित करना चाहिये कि संतों के प्रति आदर भाव बना रहे। वर्तमान विवाद में संत समाज और प्रशासन के बीच किसी भी विवाद की स्थिति में संयमित बयान और बातचीत के जरिये समाधान निकालने की उम्मीद की जाती है। उक्त जानकारी परमधर्माधीश शंकराचार्यजी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने दी।

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